नितान्त आफ्नो !!

Sunday, January 22, 2012

हम होली मनाएँ प्यारसे : माधब प्रसाद कोइराला


हम होली मनाएँ प्यारसे

होलीका है रंग अनेक ,
जात जाती फरक है,भाव है एक
धरती गगन उमंगमे हैं सारे
... खेलते होली लगते न्यारे
सारे लगते प्यारे प्यारे
जीव जगत सारे न्यारे
आइ होली खुसियालीकी
हुवा दहन होलीका जालीकी
युबतीयोका गाल है लाली
पिए भांग चले मतवाली
खुला पांव खुली केस है सारे
प्यार उमंग भरी देस है प्यारे
लोला लाल लिए लड़कियाँ
लड़के झांकते खोल खीड़कियाँ
प्यारसे एक आपसमे बुलाते
मिठा व्यंजन बांटके खाते

खीर पुड़ी और सेल है सारे
मिथाइया बहु रंग नीहारे
उबतीयोंमे आँख मिचोली है
फिर ये कहते कदम कदम पर,
बरा न माँनो होली है .

रंगमंच राजनेता सारे
बाल बृद और कृसक हमारे
ब्यापारिसे दोस्ती बढ़ाते है
भूलके दुख सालों का सारा
मीलकर साथ् ये खाते है
रंगे चुनारी हर महिला झुमे
गाउँ सहर हर घर घर घुमे
प्यार सबोका चुराते है

बनाकर मिस्टान् खुद अपनी हथो
सारे बन्धु जनोको खिलाते है
होलिका आइ कपट चालसे
दहक गइ अन्गारपे
दुनिया वालोकी जीत हुइ है

हम होली मनाए प्यारसे
 
माधब प्रसाद कोइराला

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