Thursday, January 26, 2012

गणतन्त्र हुवा है देस हमारा : माधब प्रसाद कोइराला


गणतन्त्र हुवा है देस हमारा
अधिकार काहाँ हम पाए है
जोततेहै खुद हाल अब भी
फसल औरोको खिलायेहै
खाता है कमाइ हमारा
... चढ़ता गाडी कार
खडी धुप हम हल जोतते
वही देता लल्कार
कब् आयेगा बिधान हमारा ?
जीसको हम सभीने पुकारा
उपर होता है झेल
नेता नगरीकसे राजनिती करते
खेलते गन्दा खेल
देस दरार पे ,पर पार्टी उँची
फसल दहकता,ना कभी सिची
मागता भीखका दान
नेता दीनको येसे ललकारे
कहता लो अनुदान
खोदते काब्र उदघाटन करते
दुखियो अहाँ करोडो मरते
करते चीता पर सत्कार,
सिक्ष्याहीन बनते सरकार
सब होते है बेकार

०६५ ९ २३ समय १० २ मध्यान्
 माधब प्रसाद कोइराला

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