Thursday, January 26, 2012

आजको बाटो

8:02 PM 0
आजको बाटो

आजको बाटो

रुढीग्रस्त पीडाको बोझ बोकेर
एउटा घरको मुली माइलो
मुग्लान पसेको छ
... अभाबै अभावको चिथरा लपेटेर
टोपी मिलाउदै बिसी झरेको छ
केहि मुठी भटमास र ठेट्ना
खाजा सामल छ उसको
खोलाको पवित्र पानि
अन्जुलिले उबाई पिउछ
पाखा सम्झदै मुग्लान लाग्छ
नोटका बिता मनमा फलाई
माइलीलाई राम्रो सारी,
चुरा र पोतेको कल्पनामा
ढुंगामा ठेस लाग्छ
उद्रिन्छ नग,
रगत्मुछे गोडा अब
तप्त बालुवामा सार्छ,
मुग्लान लाग्छ
अनपढ ठितौले बैंस
दर्मान,पालेको काम खोज्छ
च्वास्स गर्छ उसको मुटु
घाउमा बालुवाले पुरिन्छ
आजको बाटो तुरिन्छ
०६८ १० १२ समय १२ ३५ मध्यान्
माधब प्रसाद कोइराला

संबिधान : माधब प्रसाद कोइराला

7:58 PM 0
संबिधान : माधब प्रसाद कोइराला

संबिधान

पीडाको ओढनी ओढेका
अनिदा नेपाली हरुमा
अब त शान्ती आउला
... फर्कन् होला द्वंन्द
हत्या हिँसा दोहोरिन्न होला
पसिना रगत रोपेको जीन्दगीको फसल
आंगभरि घाम ओढेर
दाइ गर्न पाइने होला
बिदा भएकी चेली
स्कुल गएको छोरा छोरी
घाँस गएकी बुढी आमाँ
धरापमा पर्दैनन् होला
नेपाली लाइ चाहिएको
संविधानको पुस्तक
बजारहरुमा पाइन्छ होला
त्यसमा अपांग,महिला,गरिब,र दलितको
हक सुरक्षीत होला
लागु होला अक्षर सः
र नेपाली आफ्नै माटोमा
रमाइलो दसैँ,तिहार,छठ,होली,
इद,बकरिद,तथा लोसार
मनाउन पाउछन होला

०६८ १० १० मध्यान् २ ३२
माधब प्रसाद कोइराला

गणतन्त्र हुवा है देस हमारा : माधब प्रसाद कोइराला

7:56 PM 0
गणतन्त्र हुवा है देस हमारा : माधब प्रसाद कोइराला

गणतन्त्र हुवा है देस हमारा
अधिकार काहाँ हम पाए है
जोततेहै खुद हाल अब भी
फसल औरोको खिलायेहै
खाता है कमाइ हमारा
... चढ़ता गाडी कार
खडी धुप हम हल जोतते
वही देता लल्कार
कब् आयेगा बिधान हमारा ?
जीसको हम सभीने पुकारा
उपर होता है झेल
नेता नगरीकसे राजनिती करते
खेलते गन्दा खेल
देस दरार पे ,पर पार्टी उँची
फसल दहकता,ना कभी सिची
मागता भीखका दान
नेता दीनको येसे ललकारे
कहता लो अनुदान
खोदते काब्र उदघाटन करते
दुखियो अहाँ करोडो मरते
करते चीता पर सत्कार,
सिक्ष्याहीन बनते सरकार
सब होते है बेकार

०६५ ९ २३ समय १० २ मध्यान्
 माधब प्रसाद कोइराला

स्वर्ग होगा सर्बत्र

7:51 PM 0
स्वर्ग होगा सर्बत्र

ये गरिबो दहक उठो
ना किसिसे बहक उठो

उठो तो अएसा ना रोक पाए
जीवन की खुसियाँ सम्हाल लाए
...
डरकी जन्जीर तोड़ो सामन्तका
ढुदो एकता सामन्त अन्तका
अधिकार तभीतो पायोगे
नहितो लुल्हा दुखी बन जंगलका
कन्डमूल ही लाकर खायोगे

जमिनोका अधिकार तलासो
भ्रस्टोका इतिहास खलासो
ना बढ्ने पाए दुवारा
तभी तेरा खुसहाल रहेगा
अह देस कहोगे हमारा

इस देशकी मीटी सर पर राखकर
तुम देसमे हलचल लायो
तोद्ता रुढीयोंका बन्धन
छुट भेद हटायो

माँ बहनोसे कह्दो पहले
पढले पोथी पत्र
सिक्ष्या पा परिवार बनेगा
स्वर्ग होगा सर्बत्र
माधब प्रसाद कोइराला

Sunday, January 22, 2012

हम होली मनाएँ प्यारसे : माधब प्रसाद कोइराला

6:44 PM 0
हम होली मनाएँ प्यारसे : माधब प्रसाद कोइराला

हम होली मनाएँ प्यारसे

होलीका है रंग अनेक ,
जात जाती फरक है,भाव है एक
धरती गगन उमंगमे हैं सारे
... खेलते होली लगते न्यारे
सारे लगते प्यारे प्यारे
जीव जगत सारे न्यारे
आइ होली खुसियालीकी
हुवा दहन होलीका जालीकी
युबतीयोका गाल है लाली
पिए भांग चले मतवाली
खुला पांव खुली केस है सारे
प्यार उमंग भरी देस है प्यारे
लोला लाल लिए लड़कियाँ
लड़के झांकते खोल खीड़कियाँ
प्यारसे एक आपसमे बुलाते
मिठा व्यंजन बांटके खाते

खीर पुड़ी और सेल है सारे
मिथाइया बहु रंग नीहारे
उबतीयोंमे आँख मिचोली है
फिर ये कहते कदम कदम पर,
बरा न माँनो होली है .

रंगमंच राजनेता सारे
बाल बृद और कृसक हमारे
ब्यापारिसे दोस्ती बढ़ाते है
भूलके दुख सालों का सारा
मीलकर साथ् ये खाते है
रंगे चुनारी हर महिला झुमे
गाउँ सहर हर घर घर घुमे
प्यार सबोका चुराते है

बनाकर मिस्टान् खुद अपनी हथो
सारे बन्धु जनोको खिलाते है
होलिका आइ कपट चालसे
दहक गइ अन्गारपे
दुनिया वालोकी जीत हुइ है

हम होली मनाए प्यारसे
 
माधब प्रसाद कोइराला