Thursday, August 25, 2011

आशिष साना किसानको

4:26 AM 1
आशिष  साना किसानको
आशिष  साना किसानको

राम्रा ति गहना आभुषण होउन्, राम्रै होउन् काचुलि ।
राम्रै होस घरबार र सखा, शिक्षित परिवारकी ।।

इच्छा शक्ति होउन् तेज पुष्प भमरा, चुस्ने न उड्ने सरी ।
भाषा भेष र देश गुनिलो, बोल्ने बनुन् शिव हरि ।।

प्रेमैको सब बोलि सुनियोस्, संस्कृत श्लोकआदि घोलि ।
राम्रै हुन् दुहुना लता तरु विसे, फलादिले  झन् झुली ।।

बाला झुलुन् अन्नादि रसले, सिंचित कुलेसा मुनि ।
गाला बालाका रहुन् ति रमिते, दुधालु धेनु दुई ।।

सानै हुन् के किसान तिनमा, दया सदाभै दिउन् ।
सानै होस के ढुकुटि तिनका, अन्नादि सदा बांडिउन् ।।

सन्तोषि फलको विवेकि मुलको, मेवा फलोस् बोटमा ।
सुसंस्कृत सब सखा रहुन् तिनका, उग्राउन् धेनु गोठमा ।।

पूजुन पांचजन्य परमेश्वर सदा,
अमृत बसोस ओठमा ।

माधब प्रसाद कोइराला

Monday, August 22, 2011

।। मुझे और कुछ कहना है ।।

9:48 PM 1
।। मुझे और कुछ कहना है ।।
  ।। मुझे और कुछ कहना है ।।

मुझे यहि पै रहना है,
मुझे फिर कुछ कहना है
क्या है कर्तव्य <
क्या है अधिकार <
नेता पिछलग्गु बन् बन्
हम तो,
हो जाते है बेकार ।
अपना हक खो देते है ,
दिन भर टहलते उनके पिछे,
थके साम सो देते है ।
अरे उगायो अन्न
लगायो बाली
हम हैं किशान नेपालका
हाथ रहे न हमारा खाली
आने दो उनको आने दो
जो दिल चाहे खाने दो
मेहमान हमारा द्धार खडा हो
भुखे मत उनको जाने दो
क्या है उनका
कुर्ता पैजामा और धुली जूता
क्या खाएगा किशानोका
उतनातो खाताहै उसका कुता ।
चपरासीसे चन्दा अशुलकर
हम देशको आगे बढाएगे
अगर धकेलना परे देशको,
उसीको बली चढाएंगे ।

चपरासी भी कोइ आदमी है ,
क्या दिल उसका भि दुःखता है
फुलता जाता हाकिम हरवक्त,
चपरासी हर दिन सुखता है ।

कभी कभी ....

9:16 PM 0
कभी कभी ....
।। कभि कभि......।।
कभि कभि मेरा मन्
रो रो के जागता है ।
कभि कभि मेरा तन
सो सो के जागता है ।।
अंधेरे है राहे सारे,
आंख बन्द ही भागता है ।
कभि कभि मेरा मन... ।
बादल तारे छिपाए,
गगन झांपता है ।
कभि कभि दिलोमे,
चन्दाभी जागता है ।।
कभि कभि मेरा मन ... ।
समिर सरगम समेटे,
बागोको ढुंढता है ।
कोयल कुहुक डाली,
फूलो पै मुडताहै ।।
कभि कभि मेरा..... ।
नयनन् धुले पडि है ,
आयनाही साफ करता ।
समझ सका न खुदको ,
समझने मे क्यो है डरता ?
कभि कभि मेरा मन ......।
।।माधब।।